जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान में संगोष्ठी हुई आयोजित

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झांसी। देश का युवा ही विकास की रीढ़ हैं। युवाओं की कुशलता, प्रवीणता और सामर्थ्य से ही देश को विकास की गारंटी दी जा सकती है। उक्त विचार छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. देवेश निगम ने शनिवार को बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान में राष्ट्र निर्माण के 72 वर्ष संभावनाएं और चुनौतियां विषय पर आयोजित संगोष्ठी में मुख्यअतिथि के रूप में बोलते हुए व्यक्त किये।
उन्होंने युवाओं का आह््वान किया कि देश के संसाधनों और आवश्यकताओं का आकलन करें। देश की जरूरतों के हिसाब से देश को आगे बढ़ाने का रोड मैप तय करें। उन्होंने कहा कि देश की समस्याओं को हल करने में युवाओं की भूमिका है। इंटरनेट के विकास के साथ दुनिया एक गांव का शक्ल अख्तियार कर चुकी है। कार्य कुशल लोगों की संख्या बढ़ाकर ही देश को गति दी जा सकती है। पूर्व समन्वयक डा. सीपी पैन्यूली ने कहा कि युवाओं को देश के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों का सही ढंग से अध्ययन करना चाहिए। समस्याओं को दूर करने के लिए उन्हें खुद समुचित ढंग से प्रयास करना चाहिए। शिक्षक उमेश शुक्ल और राघवेंद्र दीक्षित ने देश के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों का विवरण पेश किया। उन्होंने कहा कि देश की कुल आबादी में कार्यशील लोगों की संख्या बढ़ाकर ही विकास की गति को तेज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी क्षेत्र में व्याप्त निराशा, हताशा और अनुत्पादकता के कारण ही अब उसके निजीकरण की बात प्रमुखता से उठने लगी है। आगे आने वाले समय में वो ही रोजगार हासिल कर सकेंगे जो वास्तव में कुशल और प्रवीण हों। इस तथ्य को ध्यान में रखकर समुचित तैयारी करें। संगोष्ठी में रोहित कुमार, प्रियांशु कुमार, संतोष कुमार मिश्र, निकिता गुप्ता, अंशुल त्रिवेदी समेत अनेक विद्यार्थियों ने विचार रखे। इस दौरान अभिषेक कुमार, जय सिंह, डा. उमेश कुमार, सतीश साहनी, संस्कृत के आचार्य रजनीकांत समेत अनेक लोग उपस्थित रहे। सभी का आभार समन्वयक डा. कौशल त्रिपाठी ने व्यक्त किया।

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